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महिला कां’स्टेबल बन गईं सुपरहीरो, ऐसे बचाई 76 बच्चों की जा’न…

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आज हम बात करने जा रहे हैं दिल्ली पु’लिस की हे’ड कां’स्टेब’ल सी’मा ढाका की, जिन्होंने लापता बच्चों को बचाकर कई मां का आंचल उजड़ने से बचा दिया। जहां कई पु’लिसवा’ले फील्ड पर काम करने से बचते हैं तो वहीं सीमा ने खुद बच्चों को तलाश करने का काम चुना और अपने सीनियर्स से भी इसके लिए अनुमति ली।

बता दें कि दिल्ली पु’लिस की हेड म’हिला कां’स्टेबल सी’मा ढा’का को उनके इस अच्छे काम के लिए क’मिश्नर ने ‘Out-of-Turn-promotion’ दिया। सीमा ने केवल 75 दिनों में 76 ला’पता बच्चों को खोज निकाला है। हे’ड कां’स्टेब’ल सी’मा ढा’का का टारगेट था एक साल में 50 बच्चे को तलाशने की, लेकिन वो अपने टारगेट पर ध्यान ना देकर ज्यादा से ज्यादा बच्चों को त’लाश’ना चाहती हैं। इसलिए वो दूसरे था’ने के भी के’स को सॉ’ल्व किया करती हैं।

ऐसे हुई थीं दिल्ली पु’लिस में भ’र्ती
एक न्यूज चैनल से बात करते हुए सीमा ने बताया कि उनके घर में परिवार में कई सारे लोग टीचर हैं, ऐसे में उन्होंने भी ऐसे ही सब्जेक्ट को चुना जिससे वो टीचर बन सकें। लेकिन उन्होंने एक दिन यूं ही दिल्ली पु’लिस की भर्ती का फॉर्म डाल दिया और पूरे कॉलेज में एक सीमा ही थीं, जिनका नंबर आया। ऐसे में सीमा ने सोचा कि उनमें कुछ खास है और वो कुछ बहुत अच्छा कर सकती हैं। इसलिए वो पु’लिस में भ’र्ती हो गईं और उन्होंने साल 2006 में पु’लिस की व’र्दी पहन ली।

खुद भी एक बच्चे की मां हैं सीमा
ढा’का यूपी के बढ़ोत की रहने वाली सीमा की शादी भी एक पु’लिस वाले से ही हुई हैं। सीमा एक आठ साल के बच्चे की मां भी हैं। ऐसे में सीमा का कहना है कि जब भी वो किसी बच्चे के गुम होने की बात सुनती हैं तो उन्हें बहुत अ’जीब लगता है। सीमा कहती हैं कि मैं कभी ये सोच में भी बर्दाश्त नहीं कर पाती हूं कि किसी का बच्चा उससे पिछड़े। इसलिए उन्होंने एक मीटिंग में अपने अफसरों से गु’मशु’दा बच्चों को तलाशने वाली सेल में काम करने की इच्छा जा’हिर की और सभी अ’फसरों ने उन्हें पूरा सपो’र्ट भी किया।