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महाशिवरात्रि पर गलती से भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 8 चीजें, वरना होगा विनाश!

इस बार यह शिवरात्रि 21 फरवरी दिन शुक्रवार को है. शिवभक्त इस दिन व्रत रखकर अपने आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. मंदिरों में जलाभिषेक का कार्यक्रम दिन भर चलता है. लेकिन क्या आपको पता हैं शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे 7 चीजों के बारे में जिसे शिवलिंग पर चढ़ाने से विनाश होता हैं, घर में दरिद्ता का वास होता हैं. आइये जानते है उस वस्तुओं के नाम.

आपको बता दें इस महाशिवरात्रि में कई सालों बाद ऐसा शुभ योग बन रहा है. इस दिन सर्वार्थ सिद्ध योग के साथ गुरु धनु राशि, बुध कुंभ राशि के साथ-साथ  महानिशीथकाल है.  इस दौरान भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव भक्तों के सारे कष्ट दूर करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं. महानिशीथकाल 21 फरवरी की रात 11 बजकर 47 मिनट से लेकर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. भगवान शिव को खुश करने के लिए हम भांग-धतूरा, दूध, चंदन, और भस्म  आदि न जाने कितनी चीजे चढ़ाते हैं. लेकिन शिवपुराण में बताया गया है कि आखिर ऐसी कौन सी चीजें है जो शिवलिंग में नहीं चढ़ाना चाहिए.

1 हल्दी: आमतौर पर हल्दी का इस्तेमाल महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन भगवान शिव तो वैसे ही सुंदर है। जिसके कारण भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर हल्दी नही चढाई जाती है. 2 केतकी का फूल:  ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की एक सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव जी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा। इस कारण केतकी के फूलों का इस्तेमाल शिव पूजन में नहीं किया जाता है.

3 तुलसी: शिव पुराण के अनुसार जालंधर नाम का असुर भगवान शिव के हाथों मारा गया था। जालंधर को एक वरदान मिला हुआ था कि वह अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह से उसे कोई भी अपराजित नहीं कर सकता है। लेकिन जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा। अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था। जिस कारण तुलसी नहीं अशुभ माना जाता है. 4 कुमकुम: इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं। इसलिए शिवलिंग में कुकुम न चढ़ाये.

5 टूटे हुए चावल: टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है। इसलिए शिवलिंग में हमेशा अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किया जाना चाहिए। 6 तिल: शास्त्रों के अनुसार तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ था। इसलिए इसे शिवलिंग में नहीं अर्पित किया जाता. 7 शंख जल: भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था। इसलिए विष्णु भगवान की पूजा शंख से होती है लेकिन शिव की पूजा नहीं की जाती है. 8 नारियल पानी: नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को अर्पित करना अशुभ माना जाता है.    

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