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भारत की ये महिला सिर्फ गंध सूंघकर ही बता देती हैं की यहाँ सांप हैं या नहीं

दोस्तों, आप लोगों बार ऐसी खबरें सुनी होंगीं की की किसी इंसान को सांप से डर नहीं लगता या ऐसे कई गाँव या जगहों के बारे में भी सुना जंहा छोटे- छोटे तक सांपो से खेलते हु उनके बीच बैठे हुए नज़र आते हैं. ऐसा माना जाता हैं की किसी किसी के पास कोई ऐसी ताकत होती है कि वो सांपो को कंट्रोल कर सकते हैं. आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका पिछले 25 सालों से सांपो के साथ एक अलग ही कनेक्शन सा हैं. उन्होंने इतने सालों से कई सारे सांपो को बचाया हैं. आयिए जानते हैं इस महिला के बारे में….

दरअसल , हम केरल की एक महिला जिनका नाम विद्या राजू हैं उनकी बात कर रहे हैं जो पिछले कई सालों से सांपो को रेस्क्यू कर चुकी हैं. इस साल केरल में बहुत ज्यादा बाढ़ आने की वजह से घरों में पनाह लेने लग गये थे और इस चीज़ के लिए लोगों का विद्या जी पास कॉल जाते हैं.

जब उनसे इस पर बात की गयी तो विद्या ने कहा कि- ‘अचानक आई बारिश की वजह से सांपों को अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलना पड़ता हैं । जब पानी उतरा तो वे यहां-वहां छिपने लगे, क्‍योंकि उन्‍हें अंदाजा ही नहीं था कि वो कहां जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातार सांप जहरीले नहीं होते हैं । हर रोज कम से कम मेरे पास 2-3 फोन कॉल आते ही हैं। आजकल तो मैं लोगों से कहती हूं कि वे सांप का फोटो मुझे वॉट्सऐप कर दें। अगर सांप जहरीला नहीं है और बाहर है तो मैं लोगों से कहती हूं कि उसे अकेला छोड़ दें। उन्होंने कहा कि रैट स्‍नेक जैसे सांप कोई नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि वो चूहे की तादाद को काबू में रखते हैं.

पिछले 25 साल से जानवरों को बचाया हैं

विद्या मूलरूप से बिहार की रहने वाली हैं, और उनके पति एनवीएस राजू नेवी के रिटायर्ड कमांडर हैं। विद्या पिछले 25 साल से गोवा के नेवी कैंपस में भटक कर आए हुए उल्‍लू, चील, कुत्‍ते, बिल्लियों और  सांपो का रेस्क्यू करती आ रही हैं. विद्या ने एक घटना की याद करते हुए बताया कि , ‘एक बार एक एनिमल रेस्‍क्‍यू कैंप में वाइल्‍ड लाइफ एक्‍सपर्ट ने एक सांप पकड़ कर उसे जंगल में छोड़ा था। उस समय मैंने सांप को पहली बार हाथ में पकड़कर देखा था।’ विद्या सांपों से इतना प्रेम करती हैं कि उन्‍हें ‘बच्‍चे’ कह कर बुलाती हैं.

सांप की गंध सूंघकर चल जाता है पता

इस घटना के बाद उन्होंने सांपो को समझना शुरू किया। उनका कहना हैं कि – ‘सांपों के बदला लेने वाली सारी कहानियां झूठी हैं। वह अपने निशान जरूर छोड़ते हैं। कई बार मैं किसी जगह पहुंचकर उस जगह की गंध से ही समझ जाती हूं कि यहां कोई सांप हैं ।’ अब तक वह सांप पकड़ने में इतनी माहिर हो चुकी हैं कि पिछले साल उन्‍हें सांप रेस्‍क्‍यू करने वाले रिसोर्स पर्सन की लिस्ट में भी शामिल किया गया था.

सांप काट चुके हैं कई बार
विद्या को कई बार सांप काट भी चुके हैं। इस बारे में उन्‍होंने बताया, की ‘जहरीले सांपों को पकड़ते समय मैं ज्‍यादा सर्तक रहती हूं। उन्होंने कहा की सांप ज़रा सा मौका पाते ही काट लेते हैं.

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