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तेजस्वी की ताजपोशी की खबर से टेंश’न में राहुल, अखिलेश और कन्हैया कुमार? वजह यहां जानिये…

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 बिहार विधानसभा चुनाव के रिजल्ट 10 नवंबर को आएंगे। उससे पहले महागठबंधन खेमे के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव की ताजपोशी की तैयारियां शुरू हो गई है। तमाम एग्जिट पोल और पार्टी के अंदरुनी सर्वे के आधार पर आरजेडी सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त दिख रही है। इत्तेफाक से बिहार चुनाव का रिजल्ट आने से ठीक एक दिन पहले यानी आज ही तेजस्वी यादव का बर्थडे भी है। इसको लेकर भी लालू यादव के परिवार के लोगों में खुशी की लहर है। तेजस्वी यादव की ताजपोशी की तैयारियों के बीच जहां एनडीए खेमे में खा’मो’शी देखी जा रही है तो दूसरी तरफ म’हागठबंध’न खे’मे के घटक दल कांग्रेस समेत अन्य दलों में गहमागहमी देखी जा रही है। अगर वास्तविक चुनाव परिणाम एग्जिट पोल के अनुरूप आते हैं तो कांग्रेस, वामदल, समाजवादी पार्टी जैसे दल खुशी इजहार करते देखे जा सकते हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि यह इन दलों के लिए चिंता का विषय भी बन जाएगा। अब आप सोच रहे होंगे कि जब इन दलों ने बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव को सपोर्ट किया है तो भला वह उनकी जीत से क्यों टेंशन में आएंगे। आइए आपके मन में उठ रहे इस सवाल का जवाब समझने की कोशिश करते हैं।

विप’क्षी दलों में अगुवाई करने की होड़

विपक्षी दलों की हाल की राजनी’ति पर गौ’र करें तो साफ तौर से दिखता है कि इनके बीच आपसी तालमेल की भारी कमी है। सभी दलों के बीच विप’क्ष की अ’गुवा’ई करने की होड़ है। साल 2018 में कर्नाटक में कांग्रेस+जेडीएस की सरकार गठन के दौरान मंच पर विप’क्षी दलों ने एकता दर्शाने की कोशिश की थी। इस दौरान कां’ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बीएसपी प्रमुख मायावती मंच पर एक दूसरे से सिर टकराकर दोस्ती दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन करीब एक साल बाद ही साल 2019 के लो”कस’भा चुना’व में मायावती ने कांग्रेस के खि’ला’फ आग उगलना शुरू कर दिया था। वहीं समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस से अलगाव कर लिया था।

वि’प’क्ष में सारे हारे हुए चेहरे

विपक्षी दलों में होड़ है कि उनकी पार्टी के नेता गठबंधन की अगुवाई करें। कांग्रेस जहां राहुल गांधी को स्थापित करने की कोशिश में है तो अखिलेश यादव खुद को विप’क्ष के नेता के रूप में खुद स्थापित करने की जुगत में हैं। वहीं वामदल कन्हैया कुमार के चेहरे को आगे कर चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि ये तीनों चेहरों का प्रदर्शन हालिया चुनाओं में खास नहीं रहा है।

कन्हैया को चेहरा बनाने में जुटा वा’मद’ल

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस अब तक मात्र छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में जीत दर्ज कर पाई है। इसमें भी कुछ ही महीने में मध्य प्रदेश भी कांग्रेस के हाथ से निकल चुका है। वहीं राजस्थान में भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच विवाद लगातार कायम है। वहीं अखिलेश यादव की अगुवाई समाजवादी पार्टी 2014 वह 2019 का लोकसभा चुनाव और 2017 का विधानसभा चुनाव बुरी तरह हार चुकी है। वामदलों का युवा चेहरा बनने की कोशिश में जुटे कन्हैया कुमार को भी 2019 के लोकसभा चुनाव में भारी हार मिली थी। यही वजह रही कि बिहार विधानसभा चुनाव में इन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दिया गया।

पीएम मोदी के सामने नहीं टिका कोई चेहरा

ऐसे में तेजस्वी यादव अगर बिहार जैसे बड़े राज्य में अपने दम पर सरकार बनाने में सफल होते हैं तो विपक्षी खेमे में उनका कद काफी बड़ा हो जाएगा। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन और नीतीश कुमार तीन ऐसे चेहरे रहे हैं जो अपने दम पर पीएम मोदी की छवि के सामने जीत दर्ज कर पाए हैं। इसमें से नीतीश कुमार पहले से ही बीजेपी के साथ हैं, वहीं सोरेन और केजरीवाल इतने बड़े राज्य के सीएम नहीं हैं कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी खेमे की अगुवाई करने का मौका मिले।

तेजस्वी बन जाएंगे तथा’क’थित से’क्यु’ल’र खे’मे का सबसे बड़ा चेहरा

लालू प्रसाद यादव का परिवार शुरू से ही बीजेपी और पीएम मोदी के प्रति मुखर रहा है, जिसके चलते वे खुद को त’थाकथि’त रूप से से’क्युल’र के सबसे बड़े पैरोकार बताते रहे हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी केवल एक बार तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। वहीं लोकसभा चुनाव के बारे में कहा जाता है कि कन्हैया कुमार को जीत ना मिल जाए इसलिए तेजस्वी ने बेगूसराय सीट से आरजेडी के प्रत्याशी उतारे थे। लालू फैमिली कभी नहीं चाहती है कि उनके युवा नेता के सामने कोई और चेहरा कॉ’म्पि’टिश’न देने के लिए उठे। ऐसे में स्व’भावि’क है कि तेजस्वी यादव की अ’गुवा’ई में बिहार में सरकार बनने से राहुल गांधी, अखिलेश यादव और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं की टेंश’न बढ़ेगी।