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जानिए पिछले जन्म में आप क्या थे? इन 10 संकेतो से

कुंडली में आपके पिछले जन्म की स्थिति लिखी होती है जैसे कि आप पिछले जन्म में क्या थे. कुंडली, हस्तरेखा या सामुद्रिक विद्या का जानकार व्यक्ति आपके पिछले जन्म की जानकारी के सूत्र बता सकता है. साथ ही ये लेख ज्योतिष की मान्यता पर आधारित है. तिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई जातक पैदा होता है तो वो अपनी भुक्त और भोग्य दशाओं के साथ पिछले जन्म के भी कुछ सूत्र लेकर आता है. ऐसा कोई भी जातक नहीं होता है, जो अपनी भुक्त दशा और भोग्य दशा के शून्य में पैदा हुआ हो.

ज्योतिष धारणा के अनुसार मनुष्य के वर्तमान जीवन में जो कुछ भी अच्छा या बुरा अनायास घट रहा है उसे पिछले जन्म का प्रारब्ध या भोग्य अंश माना जाता है. आपको बता दें कि पिछले जन्म के अच्छे कर्म इस जन्म में सुख देते है और पिछले जन्म के पाप इस जन्म में दुख देते है. ये खुद का जीवन देखकर जाना जा सकता है. हो सकता है इस जन्म में हम जो भी अच्छा या बुरा कर रहे हैं, उसका खामियाजा या फल अगले जन्म में भोगेंगे या पाप के घड़े को तब तक संभाले रहेंगे, जब तक कि वह फूटता नहीं है. आपके इस जन्म में किए गए अच्छे या बुरे कर्म अगले जन्म तक आपका पीछा करेंगे।

  1. दोस्तों ज्योतिष के अनुसार जातक के लग्न में उच्च या स्वराशि का बुध या चंद्र स्थिति हो तो ये उसके पूर्व जन्म में सद्गुणी व्यापारी होने का सूचक है. आपको बता दें कि अगर लग्नस्थ बुध है तो वणिक पुत्र होकर विविध क्लेशों से ग्रस्त था।
    2. अगर दोस्तों किसी जातक की कुंडली के लग्न स्थान में मंगल उच्च राशि या स्वराशि में स्थित हो तो इसका अर्थ है कि वो पूर्व जन्म में योद्धा था. यदि मंगल षष्ठ, सप्तम या दशम भाव में है तो ये दोस्तों ये माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में बहुत क्रोधी स्वभाव का था।

3. वहीं यदि जातक की कुंडली में 4 या इससे अधिक ग्रह उच्च राशि के अथवा स्वराशि के हों तो ये माना जाता है कि जातक उत्तम योनि या जीवन भोगकर यहां जन्म लिया है.


4. दोस्तों यदि जातक की कुंडली में 4 या इससे अधिक ग्रह नीच राशि के हों तो ऐसा माना जाता है कि जातक ने पूर्वजन्म में निश्चय ही आत्महत्या की होगी।

5. आपको बता दें कि यदि जातक की कुंडली में लग्नस्थ गुरु है तो माना जाता है कि जन्म लेने वाला जातक बहुत ज्यादा धार्मिक स्वाभाव का था और यदि जातक की कुंडली में कहीं भी उच्च का गुरु होकर लग्न को देख रहा हो तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में धर्मात्मा, सद्गुणी एवं विवेकशील साधु अथवा तपस्वी था. साथ ही अगर गुरु शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या पंचम या नवम भाव में हो तो भी उसे संन्यासी माना जाता है।

6. यदि कुंडली में सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो अथवा तुला राशि का हो तो दोस्तों ये माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में भ्रष्ट जीवन जीकर जन्मा है।


7. यदि जातक की कुंडली में लग्न या सप्तम भाव में शुक्र ग्रह हो तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में जीवन के सभी सुखों को भोगने वाला राजा अथवा सेठ था।


8. यदि जातक की कुंडली में लग्न, एकादश, सप्तम या चौथे भाव में शनि हो तो ये माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में पापपूर्ण कार्यों में लिप्त था।

9. यदि जातक की कुंडली में लग्न या सप्तम भाव में राहु हो तो ये माना जाता है कि जातक की मृत्यु स्वभाविक रूप से नहीं हुई होगी।
10. यदि जातक की कुंडली में ग्यारहवें भाव में सूर्य, पांचवें में गुरु तथा बारहवें में शुक्र है तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में धर्मात्मा प्रवृत्ति का तथा लोगों की मदद करने वाला था।

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