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घ’र की इ’स दि’शा में क’छुआ र’खने से पै’सों में होगी त’रक्की, प’ढ़ाई और नौ’करी में मि’लेगी…

धार्मिक खबर

ह’र घ’र में को’ई ना को’ई वा’स्तु दो’ष अ’वश्य हो’ता है, जि’स से घ’र वा’लों की तर’क्की या प्र’गति न’हीं हो’ती है. आ’ए दि’न को’ई ना को’ई परे’शानी रह’ती है. घ’र में र’हने वा’लों को सु’खी रख’ने के लि’ए औ’र घ’र में सु’ख स’मृद्धि पा’ने के लि’ए फें’गशु’ई क’छुए का प्रयो’ग क’रना चा’हिए. आ’इए जा’नते हैं घ’र में कछु’आ र’खने के फा’यदोंं के बा’रे में…

क्या है फें’गशुई कछु’आ?  

कछु’आ घ’र या व्या’पार में ध’न ला’ता है. इस’में पै’से ला’ने की ए’क विल’क्षण चुंब’कीय श’क्ति हो’ती है. उस’के मु’हं में ए’क सि’क्का हो’ता है.कछु’आ ब्र’ह्माण्ड की स’कारात्मक ऊ’र्जा से भ’रा हु’आ हो’ता है. इस’में ए’क तर’ह की स’कारात्मक ऊ’र्जा हो’ती है. क’छुआ ज’ल औ’र ज’मीन दो’नों ज’गह रह’ता है. पृ’थ्वी प’र अ’पनी पू’री कला’ओं से ऊ’र्जा पै’दा क’रता है. क’छुआ ला’ने से घ’र, का’र्यालय, फै’क्ट्री, दु’कान या व्या’पार स्थ’ल प’र स’कारात्मक ऊ’र्जा र’हती है, जिस’से सब’का वा’स्तु दो’ष दू’र हो’ता है. पै’से कमा’ने की ताक’त ब’ढ़ती है. मा’नसिक तना’व दू’र हो’ता है औ’र ज’ल्दी-ज’ल्दी सा’रे का’म बन’ते च’ले जा’ते हैं. ध’न ला’भ के लि’ए क’छुए को घ’र फै’क्ट्री औ’र दु’कान में अंद’र की तर’फ मुं’ह कर’के छिपा’कर र’खा जा’ता है.

क’छुआ मका’न के वा’स्तु दो’ष को दू’र कर’ता है-

म’कान के द’क्षिण मु’खी या प’श्चिम मु’खी कें’द्र में ए’क कछु’आ र’खने से वा’स्तु दो’ष दू’र हो जा’ता है. घ’र के म’ध्य में नौ क’छुआ रख’ने से नौ ग्र’हों के बरा’बर ऊ’र्जा उ’त्पन्न हो’ती है. य’ह घ’र के सा’रे वा’स्तु दो’षों को दू’र क’र दे’ता है औ’र आप’की कुं’डली के सा’रे ग्र’हों को भी शु’भ बना’ता है.

घ’र के वा’स्तु को कछु’आ द्वा’रा कै’से ठी’क क’रें-

मु’ख्य द्वा’र के अं’दर की तर’फ कछु’आ लगा’एं, तो मान’सिक शां’ति मिल’ती है औ’र घ’र का वा’स्तु दो’ष ठी’क हो जा’ता है. अ’गर आ’पका व्यापा’र क’म च’ल र’हा है या आ’पके ऑ’फिस में आप’का का’म ठी’क न’हीं च’ल र’हा है, तो अ’पने ऑ’फिस, घ’र में ए’क-ए’क क’छुआ र’खें, जि’स घ’र में कछु’आ लगा’या जा’ता है, उ’स घ’र में लो’ग ज’ल्दी-ज’ल्दी बीमा’र न’हीं पड़’ते हैं.

पढ़ा’ई औ’र नौ’करी में ला’भ दे’ता है कछु’आ-

– अ’गर आप’के ऑ’फिस में का’म में म’न न’हीं लग’ता है या ऑ’फिस में आ’पको प्रमो’शन न’हीं मि’ल र’हा है तो ऑफि’स के टेब’ल प’र कछु’आ र’खने से फा’यदा हो’गा.

– जि’न ब’च्चों का पढ़ा’ई में म’न न’हीं लग’ता है या प’ढ़ाई में अ’च्छे नं’बर न’हीं आ’ते हैं, तो स्ट’डी टेब’ल प’र क’छुआ रख’ना चाहि’ए.  

– कछु’आ रख’ने से प’ढ़ाई में म’न लग’ता है औ’र परीक्षा’एं अ’च्छी जा’ती हैं.