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घ’र में ल’गा है अ’गर तुल’सी का पौ’धा, तो भूल’कर भी न क’रें ये गल’तियां, वर’ना आ’प औ’र आप’के ब’च्चों प’र हो’गा बु’रा…

हिंदी खबर

सना’तन ध’र्म में तुल’सी का पौ’धा बहु’त ही पूजनी’य मा’ना ग’या है, तुल’सी के पौ’धे की पू’जा तो की ही जा’ती है , सा’थ ही य’ह औ’षधीय गु’णों से भी भर’पूर हो’ता है। तुल’सी का पौ’धा घ’र में रख’ना बहु’त शु’भ मा’ना जा’ता है। पह’ले के सम’य में लो’ग अ’पने घ’र के आंग’न में तुल’सी का पौ’धा अ’वश्य लगा’या क’रते थे। आ’ज के स’मय में र’हन-सह’न औ’र घ’र की ब’नावट में ब’हुत बद’लाव आ ग’या है, लेकि’न आ’ज भी तुल’सी के पौ’धे का उत’ना ही म’हत्व है। तु’लसी का न के’वल धा’र्मिक रू’प से ब’ल्कि ज्योति’ष औ’र वा’स्तु में भी तुल’सी का बहु’त म’हत्व है। घ’र में तुल’सी लगा’ना बहु’त ला’भप्रद रह’ता है, इसलि’ए ह’र व्य’क्ति को अ’पने घ’र में ए’क छो’टा सा तुल’सी का पौ’धा अ’वश्य लगा’ना चा’हिए। य’दि आप’के घ’र में तुल’सी का पौ’धा ल’गा है या आ’प तुल’सी का पौ’धा ल’गाने जा र’हे हैं तो उ’ससे प’हले कु’छ बा’तों को जा’न ले’ना ज’रुरी हो’ता है। जा’नते हैं तुल’सी ल’गाने के निय’म…

हिं’दू ध’र्म में ह’र धा’र्मिक का’र्य में तुल’सी का उ’पयोग कि’या जा’ता है। खासतौ’र प’र य’दि भग’वान वि’ष्णु का पूज’न क’रने के लि’ए तु’लसी ब’हुत आ’वश्यक मा’नी ग’ई है। भगवा’न वि’ष्णु को तु’लसी अ’ति प्रि’य है। भग’वान वि’ष्णु की पू’जा में कि’सी भी त’रह से ताम’सिक ची’जों का प्र’योग व’र्जित है सा’थ ही तु’लसी ब’हुत ही पवि’त्र हो’ती है, इसलि’ए जि’स स्था’न प’र तुल’सी का पौ’धा ल’गा हो व’हां प’र क’भी मां’स या मदि’रा का से’वन भूल’कर भी न’हीं क’रना चा’हिए। तु’लसी की मा’ला धार’ण क’रने वा’लों को भी मां’स म’दिरा कि’सी भी तर’ह की न’शीली या ता’मसिक ची’जों का सेव’न न’हीं कर’ना चा’हिए।