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अजन’बियों से शारी’रिक सं’बंध बना’ने से प’हले ज’रूर प’ढ़ लें ये खब’र, व’रना हो सक’ता है बहु’त…

हिंदी खबर

नई दिल्ली. आज के स’मय में शारी’रिक संबं’ध बना’ना ए’क आ’म बा’त हो ग’ई है औ’र कि’सी अ’जनबी के सा’थ संबं’ध ब’नाने का प्रचल’न भी ते’जी से ब’ढ़ रहा है। लेकि’न कु’छ बा’ते है जो शारी’रिक सं’बंध ब’नाने से पह’ले आ’पके लि’ए जा’नना बेह’द जरु’री है और इ’न बा’तों को आ’पको ज’रुर ध्या’न में रख’ना चा’हिए। च’लिए जा’नते है कौ’न सी व’ह बा’तें है…

* य’दि कि’सी अ’जनबी से मुला’कात होने के बा’द दू’सरा श’ख्य आ’पसे सं’बंध ब’नाने को रा’जी हो ग’या है तो इस’की ज्या’दा संभा’वना रह’ती है कि उ’सने पह’ले की शारी’रिक सं’बंध ब’नाए हो। ऐ’से सम’य प’र आप’को अप’नी सुर’क्षा के प्र’ति साव’धान र’हना चा’हिए। इ’सके लि’ए सब’से ज्या’दा जरु’री है कि संबं’ध बना’ते सम’य आ’प कंडो’म का इस्तेमा’ल क’रें।

* कि’सी अज’नबी से अग’र आ’प सं’बंध ब’नाने जा रहे है तो इ’स बा’त का ज’रुर ध्या’न र’खें कि ज’गह का चय’न आप’को क’रना है। कि’सी भी अज’नबी के सा’थ आ’प उ’सके सा’थ न’हीं जा स’कते। इसलि’ए अ’च्छा य’ही हो’गी कि जग’ह का च’यन आ’प खु’द क’रें। इस’के लि’ए आ’प अप’ना घ’र औ’र दो’स्त के घ’र को चु’न स’कते है।