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नव’रात्रि में घर की इस दि’शा में रखे मां दु’र्गा की मू’र्ति, आएगा ध’न हों’गे मा’लामाल….

धार्मिक खबर

नवरा’त्रि के नौ दि’नों में हम दे’वी के नौ रू’पों का आ’ह्वान कर’ते हैं, घ’र में श’क्ति का आ’ह्वान करने से हर त’रह की नका’रात्मक ऊ’र्जा ख’त्म हो जाती है. नव’रात्रि के दि’नों में मू’र्तियों की स’ही दि’शा में स्थाप’ना और वि’धिवत त’रीके से पू’जन आप’को त’रक्की की ऊंचा’इयों प’र ले जा सक’ता है, तो आइए जान’ते हैं कि इ’न नव’रात्रों में कि’न मूर्ति’यों की स्थाप’ना शु’भ र’हेगी और वा’स्तु के अनुसा’र कि’न उपा’यों से घ’र में खुश’हाली बढ़े’गी…

  • दे’वी भग’वती की प्रति’मा घर के उ’त्तर पू’र्व की दि’शा में स्था’पित क’रें.
  • पू’जा घ’र या मंदि’र में ज’हां भी आ’प प्रति’मा की स्थाप’ना क’र रहे हैं, उस’के बा’हर ह’ल्दी या सिं’दूर से स्‍वा’स्तिक का च‍ि’ह्न ज’रूर बना’एं.
  • घ’र में 3 इं’च से ब’ड़ी प्रति’मा नहीं रख’नी चा’हिए, सा’थ ही प्र’त‍िमा का रं’ग या पू’जा घ’र का रं’ग ह’ल्का पी’ला, ह’रा या गुला’बी ही रख’ना चा’हिए.
  • अ’गर घ’र में खुश’हाली नहीं रह’ती तो न’वरात्र के 9 दि’न घ’र में हव’न ज’रूर क’राएं जि’समें सा’धक का चेह’रा पू’र्व दि’शा की ओ’र हो और हव’न क’रा रहे आ’चार्य का चे’हरा उ’त्तर की ओर हो’ना चा’हिए.
  • घ’र में वा’स्तु दो’ष के निवा’रण के लिए नव’मी और द’शहरा वा’ले दिन 10 दीप’क 10 दि’शाओं में ज’लाने चाहि’ए.
  • इ’न्हें द’स दि’ग्पाल कह’ते हैं, इ’न दिशा’ओं और इन’के दे’वताओं के ना’म हैं- पू’र्व में इं’द्र, आ’ग्नेय को’ण में अ’ग्निदेव, द’क्षिण में य’म, दक्षि’ण-प’श्चिम में नि’ऋति, प’श्चिम में व’रुण दे’व, वा’यव्य अ’र्थात उ’त्तर-प’श्चिम में मा’रुत या वा’यु दे’व, उ’त्तर दि’शा में कु’बेर और उ’त्तर-प’श्चिम में शि’व.
  • स’नातन सं’स्कृति में इ’न 8 दि’शाओं के अ’लावा 2 अ’न्य दि’शाएं भी हैं, पह’ली दि’शा आ’काश की ओर है, य’हां ब्र’ह्मा जी का आ’धिपत्य है, उन’के ना’म का दी’प पू’र्व व ईशा’न के बी’च में जला’ना चा’हिए. अं’तिम और द’सवीं दि’शा पाता’ल की ओर है, इ’सके अ’धिपति अ’नंत दे’व हैं, इन’के ना’म का दीप’क द’क्षिण-पश्चि’म और प’श्चिम के बी’च में जला’ना चाहिए.
  • नव’रात्र में वा’तावरण को शु’द्ध और प’वित्र कर’ने के लि’ए घ’र में गु’ग्गुल, लोबा’न, क’पूर, दे’शी घी का प्र’योग करें.
  • उ’त्तर-पू’र्व दि’शा में क्रि’स्टल या पि’रामिड ज’रूर र’खें.