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इन 4 कारणों के ज़ारिए जानिए, महिलाओं को क्यों नहीं है श्म’शा’न घाट में जाने की इजाजत

प्राचीन हिंदू शास्त्रों में अनुसार महिलाओं को बेहद आजादी दी गई है. आपको बता दें कि इन सब ग्रंथों में कहीं भी नहीं लिखा है कि महिलाओं को श्म’शा’न नहीं जाना चाहिए या मृतक परिजन का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए. वहीं हिंदू शास्त्रों में महिलाओं को गायत्री मंत्र जाप करने तथा देवियों को जनेऊ पहनाने तक का अधिकार दिया गया है. फिर भी कुछ विशेष कारणों के चलते महिलाओं को अंतिम संस्कार के समय श्म’शा’न में जाने से रोका जाता है. आइए आपको बताते है इसकी वजह क्या है

(1) माना जाता है कि महिलाओं कोमल ह्रदया होती है. जिसके कारण किसी भी बात पर वो सहज ही डर सकती है. अं’ति’म सं’स्का’र करते समय मृ’त शरीर कई बार अकड़ने की आवाजें करता हुआ जलने लगता है, जिससे महिलाओं को डर लग सकता है. साथ ही इसके अतिरिक्त वहां पर मृ’त’क का कपाल फोड़ने की क्रिया भी की जाती है जो किसी को भी डरा सकती है।

(2) आपको बता दें कि श्म’शान में मृतक का अंति’म संस्का’र करते समय शोक का माहौल होता है. उस समय लोग रोते हैं और बड़ा ही ह्रदयविदारक दृश्य होता है जिसका भी महिलाओं तथा छोटे बच्चों के मन पर बहुत गहरा असर पड़ता है. इसीलिए भी महिलाओं तथा छोटे बच्चों का श्म’शान में जाना वर्जित किया गया है।

(3) कुछ लोगों के अनुसार श्म’शान में अतृप्त मृत आत्मा’एं घूमती रहती हैं. ये आ’त्माएं जीवित प्राणियों के शरीर पर कब्जा करने का अवसर ढूंढती रहती है। जिनके छोटे बच्चे तथा रजस्वला स्त्रियां सहज शिकार होती हैं. इनसे बचाने के लिए भी महिलाओं तथा छोटे बच्चों को श्म’शान जाने की मनाही की जाती है।

(4)वहीं कुछ लोगों के अनुसार किसी के मरने से घर अशुद्ध हो जाता है. इसीलिए जब मृतक के बॉ’डी को अंतिम सं’स्का’र के लिए ले जाया जाता है तो घर की महिलाओं को ये जिम्मेदारी दी जाती है कि वो घर की सार-संभाल करते हुए धार्मिक तारिको से स्वच्छ करें. यदि महिलाएं श्म’शा’न जाएंगी तो ये प्रक्रिया नहीं हो पाएंगी।

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